!! भादव मन भरिआयल !!


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साओनके सुख नहिए भेटल,
भादव मन भरिआयल !
आब करु हुनकर कि आशा,
एखन धरि नइ आयल !!
एखन धरि नइ आयल,
देलक नइ कोनो समाधो !
मनमे छल किछु बात,
कैल सबकिछु बर्वादो !!
दुखो दर्द नइ बुझल काशी,
मुँह हमर करिआयल !
सुखक आशमे बाँचल छलौ,
दुखे दुख चलिआयल !!

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साहित्यकारः काशिकान्त झा (रसिक)

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