बहिन सीतासन पाहुन श्रीराम हैतई !
कहु मिथिला कोना नई महान हैतई !!
हम अपनेसँ कुटई छी ढेकीमे धान,
भोग पण्डित लगाक करैछथि लवाण,
अपना भोजनसँ पहिने किछु दान हैतई
कहु मिथिला …………
करब पाहुनके स्वागत भगवाने जका,
बास मनमे करइछथि ओ प्राणे जका,
बुझब दोसरोके अपनेसन जान हैतई
कहु मिथिला ………….
एक गाममे बसइय जत बाभन भुमिहार,
हिन्दु मुस्लमके भेद नई दुसाध आ चमार,
एक रंगक सब जातिके गान हैतई
कहु मिथिला …………..
जकर चर्चा अई सगरो आकाश आ पाताल,
एत आबला देव सब रहइछथि बेहाल,
सबदिन शास्त्र आ पुराणक बखान हैतई
कहु मिथिला ……………
प्रकृतिके गजबे अई अनुपम श्रृंगार,
गंगासागर सन सागर कतेको हजार,
जत घर घर एकाधटा विद्वान हैतई
कहु मिथिला …………….
देश पुरुष प्रधान एत नारी पुजाइय,
सबके घरमे अई बेटी जे शक्ति बुझाइय,
सब बेटीके सीतेसन मान हैतई
त कहु मिथिला कोना नई महान हैतई
कविः काशिकान्त झा (रसिक)



















